मोदी सरकार के फैसले से जहाँ विपक्ष के तेवर पूरी तरह से गर्मजोशी में हैं वही भारतीय जनता पार्टी के करीबी और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष अनुयायी ने आज एक पत्रिका से बातचित करते हुए अपने मन की भड़ास निकाल दी | जी हाँ , योगगुरु बाबा रामदेव ने बातचीत में कहा की देश में कैश सप्लाई की कमी नहीं थी किन्तु कैश सारा का सारा बेईमान लोगों को दे दिया गया | उन्होंने विभिन्न बैंकों के शाखाओं के साथ साथ रिज़र्व बैंक को पर भी आरोप लगाते हुए कहा की इन बैंकों के कुछ लोगों की वजह से आम आदमी तक पैसा नहीं पहुच पा रहा है क्योंकि ये सभी बैंक के कर्मचारी मिलकर २-३ लाख करोड़ का घोटाला कर चुके हैं इस नोटबंदी के दौरान |
उन्होंने रिज़र्व बैंक पर आरोप लगाते हुए बोला की ये बात बड़ी ही प्रश्नचिन्हित है की एक ही सीरीज के २ नोट कैसे आ सकते हैं ? ऐसा है तो ये तो देश की अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा कलंक होगा | इन्हें या तो पहले की सरकार ने यानी कांग्रेस ने छपवाया था या तो मौजूदा सरकार और रिज़र्व बैंक ने पूरी लापरवाही के साथ ये नोट छापे हैं |
योगगुरु का कहना था की इम्प्लीमेंटेशन में कुछ चीजों को सुधार के साथ प्रस्तुत किया जा सकता था जो की नहीं किया गया | उन्होंने कहा की उन्होंने मोदी सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक को ३ सिरे से सलाह दिया था ;
१. बड़ी करेंसी वापस लो
२. सारे सिस्टम को कैशलेस बनाओ और ट्रांसेक्शन टैक्स लगाओ
३. बैंकों की साड़ी व्यवस्था पूरी तरह से पारदर्शी बनाओ |
किन्तु मोदी सरकार ने हमारी सिर्फ १ बात को ही माना बाकी के २ बात को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर दिया , रामदेव ने कहा | उन्होंने the quint पत्रिका से बात करते हुए कहा की यदि इन तीन बातों को ध्यान में रखते हुए एक साथ लागू किया जाता तो निःसंदेह आज की भयवाह स्थिति जैसी स्थिति नहीं होती |
अब सोचने वाली बात ये है की यदि नोटबंदी का श्रेय अभी तक मौजूदा सरकार यानी की मोदी सरकार को जा रहा था तो इस स्कीम में कमी के सामने आते ही सारी कमियों का श्रेय भारतीय रिज़र्व बैंक को जाना चाहिए या नही ?