‘हिन्दू यहाँ, मुस्लिम यहाँ , मिलके कहो हम एक हैं|
आवाज़ दो हम एक हैं जागो’
सिर्फ गीत के बोल नहीं बल्कि एक भावना है जिसकी अवहेलना बेशक कुछ राजनितिक और संगठित दल अपने अपने फायदे के लिए कर रहे हैं| किन्तु इसमें गलती उन आम लोगों की है जो इनके बहकावे में आके इस भारत देश की सबसे बड़ी विशेषता ‘अनेकता में एकता’ को दाव पर लगाए जा रहे हैं |
हमारे महान शायरों ने न जाके कितनी बार ही देश के लोगों को प्यार के पैगाम दिए हैं ‘मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, हिंदी हैं हम वतन है हिंदुस्तान हमारा’ ऐसा ही कुछ कहना था एक महान मुस्लिम शायर ‘इकबाल ख़ान’ का | लेकिन कुछ चंद धर्मगीर अपना असल धर्म भूल चुके हैं |
‘राहत इन्दोरी’ शायरी की दुनिया में आज की तारीख में एक मशहूर नाम है जिसके ना जाने कितने ही दीवाने हैं | यूँ तो आम तौर पर देश और यहाँ की व्यवस्था के ऊपर कई कवितायें और शायरी हमने अनेकों बार राहत साहब के मुख से सुना | किन्तु आज उन्ही की कुछ खूबसूरत पंक्तियाँ एक छोटे से बच्चे की जुबान से सुनिए, जिसने चंद लाइन में बता दिया की हिन्दुस्तान किसी एक के बाप का नहीं है
https://www.youtube.com/watch?v=cWjr_knPaYg