बनारस अइसन शहर हउवा जहाँ एक से बढ़ के एक कलाकार बाड़े। नेतागिरी का त इ सबसे बढ़वार सिद्धपीठ बा । आज से पच्चीस साल पहिले जे इहाँ पढ़े-लिखे खातिर आइल, उ कैसहूँ कई के इहाँ रही के पूरा कोसिस कैलस और भोले बाबा के असीस से यहीं ज रहू गईल।
नोकरी-वोकरी मिल गईल त ठीकै ठीक नहीं त दलाली जिंदाबाद, जब वो हू जुगाड़ न लग पावै त छूट के टाइम पर कुरता पैजामा और फिर गान्धीबबा के टोपी लगा के शुरू नेतागिरी।
लेकिन इ परिस्थिति जन्य नेतागिरी के अलावा इहाँ नेतागिरी क कई थे पाठशाला भी बा।
सबसे बढ़वार पाठशाला रहल बी एच यू जहाँ से छात्र नेतवन सब बड़े आगे जात रहलन, आजकल उहो बंद बा।
राहुल गांधी त बड़ा सहकल बाड़े लेकिन गुरु जे छात्रसंघ क शकल नाहीं देखले ऊ ओकर का उद्धार करी। पढके भाषण देवे वालन के भरोसे कब ले देश चली। इसे निक त गऊऐ रहल जहाँ कम से कम आफत विपत में बिना स्वार्थ के चार लोग खड़ा त हो जाने।
इहाँ त साला लाशो ढोए खातिर केहू जल्दी फोन कैले पर भी न आवल चाहत ……………
चला चलल जाय फिर से वोहीं।
जय ग्राम्यजीवन